Description
हमारे घर के ठीक सामने, हमारी बालकनी से सटा हुआ एक ‘अशोक’ का वृक्ष है। पिछले कई वर्षों से, यह वृक्ष हमारे दैनिक जीवन का साक्षी रहा है। हर सुबह, हम उस वृक्ष के सम्मुख बैठकर ‘ॐ’ (Om) का उच्चारण करते हैं।
समय बीतने के साथ, हमने एक अद्भुत चमत्कार घटते देखा—चमत्कार, जिसे आज का तर्क भी शायद ही नकार पाए। उस वृक्ष ने अपनी एक भी टहनी हमारी बालकनी की ओर नहीं बढ़ने दी। ऐसा लगता है जैसे वह वृक्ष हमारी चेतना और प्रार्थनाओं के प्रति पूरी तरह सजग है। वह हमें अपनी छाया और सुरक्षा तो देता है, लेकिन हमारे मार्ग में कभी बाधा नहीं बनता।




Reviews
There are no reviews yet.