Description
मनुष्य का जीवन केवल सीधी रेखाओं में नहीं चलता। यह सुख और दुःख, लाभ और हानि, प्रेम और घृणा, प्रकाश और अंधकार के बीच निरंतर चलने वाली एक यात्रा है। शायद इसी कारण जीवन को समझना सरल नहीं, बल्कि अनुभव का विषय है। जब हम प्रकृति को ध्यान से देखते हैं, तो पाते हैं कि संपूर्ण अस्तित्व संतुलन पर आधारित है।
दिन और रात का क्रम, ऋतुओं का परिवर्तन, श्वास का आना-जाना, हृदय की धड़कन, सूर्य के रंगों का परिवर्तन — सब एक अदृश्य संतुलन के नियम का पालन करते प्रतीत होते हैं। यह पुस्तक उसी संतुलन को समझने का एक विनम्र प्रयास है। समय के साथ यह अनुभव हुआ कि “संतुलन” शब्द का वास्तविक महत्व केवल अनुकूल परिस्थितियों में नहीं समझ आता।




Reviews
There are no reviews yet.