Description
मानव मन की दिशा न तो केवल भाग्य से तय होती है, न ही ग्रहों की चाल से। हमारे भीतर बहने वाले हार्मोन्स ही वे सूक्ष्म संदेशवाहक हैं जो हर विचार, भावना और निर्णय को आकार देते हैं। कोर्टिसोल, नॉरपेनेफ्रिन, प्रोलैक्टिन, टेस्टोस्टेरोन, DHEA, ऑक्सीटोसिन, डोपामिन और सेरोटोनिन — ये सभी हमारे भीतर छिपे हुए अदृश्य कलाकार हैं, जो कभी भय, कभी प्रेम, कभी साहस और कभी शांति का संगीत बजाते हैं।
मूलाधार से पीनियल ग्रंथि तक, हमारी रीढ़ के प्रत्येक बिंदु में चेतना की एक तरंग प्रवाहित होती है। जब हम पद्मासन में बैठते हैं, सोच को शांत करते हैं और श्वास को संतुलित करते हैं, तब यह ऊर्जा ऊपर उठकर हमारे मस्तिष्क की उन ग्रंथियों को जागृत करती है जो “विज्ञान” और “आध्यात्म” के बीच की कड़ी हैं। यह वही स्थान है जहाँ जीव-विज्ञान चेतना में बदल जाता है।




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