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अंधकार से प्रकाश तक – एक आत्मयात्रा

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जब जीवन का सूर्य अस्त होने लगता है, तब बहुत से लोग अंधकार से डरते हैं। पर कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उसी अंधकार में अपना प्रकाश खोजने निकल पड़ते हैं।

यह कहानी ऐसे ही एक व्यक्ति — अयान — की है, जो अंधकार से गुजरते हुए प्रकाश बन जाता है। अयान हर मनुष्य का प्रतीक है — जो भ्रम, अहंकार, और पीड़ा में उलझा है। पर भीतर कहीं न कहीं एक सूर्यप्रभा — उसकी चेतना की आवाज़ — उसे बार-बार पुकारती है।

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Description

यह कथा केवल घटनाओं की नहीं, बल्कि आत्मा की परतों के खुलने की यात्रा है — जहाँ हर अध्याय एक चेतना की सीढ़ी है, जो मनुष्य को अपने भीतर उतरने के लिए आमंत्रित करता है।
जीवन कोई सीधी रेखा नहीं, वह एक वृत्त है। अंधकार और प्रकाश एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही चेतना के दो आयाम हैं।

हर व्यक्ति कभी न कभी उस अमावस्या में पहुँचता है, जहाँ उसे कुछ नहीं सूझता — और फिर वहीं से उसकी यात्रा आरंभ होती है। यह ग्रंथ उसी यात्रा का वर्णन है — “अयान” की यात्रा, जो वास्तव में हम सब की यात्रा है।
“अंधकार तुम्हारा शत्रु नहीं — वह तुम्हारे भीतर का गुरु है।”
अयान की कहानी हम सबकी कहानी है। हर मनुष्य जीवन में किसी न किसी रूप में अंधकार, अहंकार, हानि, और पुनर्जन्म से गुजरता है। पर अंततः सबकी यात्रा स्वीकृति, कृतज्ञता और आनंद की ओर ही है।
जिस दिन मनुष्य यह समझ लेता है कि — “मैं अंधकार नहीं, बल्कि उस अंधकार में जलता प्रकाश हूँ,” उसी दिन आत्मा अपने पूर्ण वृत्त में लौट आती है — अंधकार से प्रकाश तक।

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