Description
दिन और रात का क्रम, ऋतुओं का परिवर्तन, श्वास का आना-जाना, हृदय की धड़कन, सूर्य के रंगों का परिवर्तन — सब एक अदृश्य संतुलन के नियम का पालन करते प्रतीत होते हैं। यह पुस्तक उसी संतुलन को समझने का एक विनम्र प्रयास है। समय के साथ यह अनुभव हुआ कि “संतुलन” शब्द का वास्तविक महत्व केवल अनुकूल परिस्थितियों में नहीं समझ आता।
वास्तव में संतुलन की आवश्यकता तब होती है जब जीवन विषम हो। जब परिस्थितियाँ हमें भीतर झाँकने के लिए विवश करती हैं। जब मन दाएँ और बाएँ के बीच भटकता है और चेतना किसी मध्य बिंदु की खोज करती है। विषम संख्या का रहस्य भी संभवतः यही संकेत देता है। तीन, पाँच, सात और नौ जैसी संख्याओं में एक ऐसा मध्य बिंदु उपस्थित रहता है जो दोनों ओर संतुलन बनाए रखता है।




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